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दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत, कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट बहाल करने से इनकार

May 29, 2026 Source: News Katha

दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत, कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट बहाल करने से इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने पार्टी के एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट को तुरंत बहाल करने की मांग को फिलहाल ठुकरा दिया है। यह फैसला पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अकाउंट को तुरंत बहाल करने का आदेश देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार का पक्ष सुने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की गई है। दरअसल, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर अपने अनोखे नाम, प्रतीकों और डिजिटल अभियानों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। पार्टी का मूल एक्स अकाउंट 21 मई को भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। इसके बाद समर्थकों ने ‘Cockroach Is Back’ नाम से नया हैंडल शुरू किया, जिसे कुछ ही दिनों में लाखों लोगों का समर्थन मिलने लगा। वर्तमान में इस नए अकाउंट के 2 लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। यह पूरा विवाद भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था। खबरों के अनुसार, वरिष्ठ वकीलों को दर्जा देने से जुड़ी सुनवाई के दौरान ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया गया और वह फर्जी डिग्री लेकर पेशे में आने वालों के संदर्भ में कही गई थी। इसी विवाद से प्रेरित होकर सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड करने लगी। पार्टी ने कॉकरोच को प्रतीक बनाकर मीम्स, व्यंग्यात्मक पोस्ट और डिजिटल कैंपेन के जरिए युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाना शुरू किया। बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही जैसे विषयों को इस अभियान का केंद्र बनाया गया। संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसे युवाओं और बेरोजगार लोगों की आवाज बताते हुए एक स्वतंत्र डिजिटल आंदोलन करार दिया है। वहीं, इसके समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। अब सभी की नजरें 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है।