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मौत बनकर फटा विस्फोटक भंडार! म्यांमार में 55 लोगों की जान गई

June 1, 2026 Source: News Katha

मौत बनकर फटा विस्फोटक भंडार! म्यांमार में 55 लोगों की जान गई
म्यांमार के उत्तरी हिस्से में स्थित नामखाम क्षेत्र रविवार को एक भीषण विस्फोट से दहल उठा। चीन की सीमा के निकट स्थित कौंगटुप गांव में हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को तबाही के मंजर में बदल दिया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस दर्दनाक घटना में कम से कम 55 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें छह बच्चे भी शामिल हैं। वहीं दर्जनों लोग घायल हुए हैं और कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। यह विस्फोट 31 मई 2026 को दोपहर के समय हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि उसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आसपास के 100 से अधिक घर पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गए। विस्फोट के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस इमारत में विस्फोट हुआ वहां बड़ी मात्रा में जेलिग्नाइट नामक विस्फोटक सामग्री रखी गई थी। जेलिग्नाइट का उपयोग आमतौर पर खनन कार्यों और चट्टानों को तोड़ने के लिए किया जाता है। माना जा रहा है कि इसी विस्फोटक सामग्री में किसी कारणवश धमाका हुआ, जिससे इतनी बड़ी तबाही हुई। रविवार शाम तक राहत और बचाव दलों ने 46 शव बरामद कर लिए थे, जिनमें छह बच्चों के शव भी शामिल थे। बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 55 तक पहुंच गई। सभी शवों को अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 74 घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई इमारतें पूरी तरह ढह गईं और पूरे गांव में मलबे का ढेर लग गया। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में धुएं का विशाल गुबार, क्षतिग्रस्त मकान और बर्बादी का भयावह दृश्य दिखाई दे रहा है। यह क्षेत्र वर्तमान में तआंग नेशनल लिबरेशन आर्मी (TNLA) के नियंत्रण में है, जो म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रही है। हालांकि, अभी तक विस्फोट के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बचाव कार्य लगातार जारी है और आशंका जताई जा रही है कि मलबे से और शव बरामद हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। इस विनाशकारी हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है और स्थानीय प्रशासन के सामने राहत एवं पुनर्वास की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।