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महर्षि सुश्रुत के योगदान को दुनिया ने माना, स्कॉटलैंड में हुआ भव्य सम्मान

June 25, 2026 Source: News Katha

महर्षि सुश्रुत के योगदान को दुनिया ने माना, स्कॉटलैंड में हुआ भव्य सम्मान
लगभग 2,600 वर्ष पहले लिखी गई ‘सुश्रुत संहिता’ को आज भी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत चिकित्सा ग्रंथों में गिना जाता है। इस प्राचीन भारतीय ग्रंथ में 1,120 बीमारियों, 700 से अधिक औषधीय पौधों, 300 से ज्यादा चिकित्सा प्रक्रियाओं और करीब 120 शल्य उपकरणों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यही कारण है कि आधुनिक चिकित्सा जगत में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। हाल ही में स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ने महान भारतीय वैद्य और शल्य चिकित्सक सुश्रुत के सम्मान में उनकी 90 किलोग्राम वजनी कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। सुश्रुत को विश्वभर में “प्लास्टिक सर्जरी का जनक” माना जाता है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रॉयल ऑस्ट्रेलेशियन कॉलेज ऑफ सर्जन्स भी उनकी प्रतिमा स्थापित कर उन्हें सम्मान दे चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुश्रुत के योगदान को स्वीकार किए बिना सर्जरी का इतिहास अधूरा है। ‘सुश्रुत संहिता’ में सर्जरी, औषधि विज्ञान, बाल चिकित्सा, विष विज्ञान, मनोरोग, नेत्र, कान, नाक और गला रोगों के साथ-साथ वृद्धावस्था देखभाल तक का विस्तृत उल्लेख मिलता है। इसमें 300 से अधिक शल्य प्रक्रियाओं और 120 से ज्यादा उपकरणों का वर्णन किया गया है। ग्रंथ में सर्जरी को आठ प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है और चिकित्सा शिक्षा के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण तथा व्यावहारिक अभ्यास पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा जलन, हीट स्ट्रोक, फ्रॉस्टबाइट, मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याओं पर भी चर्चा की गई है। सुश्रुत ने कई बीमारियों को जीवनशैली से जोड़ते हुए शारीरिक गतिविधियों को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। आज जब भारतीय ज्ञान परंपरा पर नए सिरे से शोध हो रहा है, तब सुश्रुत की उपलब्धियां दुनिया भर में प्राचीन भारत के वैज्ञानिक और चिकित्सा ज्ञान की महान विरासत को फिर से उजागर कर रही हैं।