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फ्रांस में हीटवेव से तबाही: 1000 मौतें, यूरोप में पिघलने लगी सड़कें और सिग्नल

June 29, 2026 Source: News Katha

फ्रांस में हीटवेव से तबाही: 1000 मौतें, यूरोप में पिघलने लगी सड़कें और सिग्नल
यूरोप इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क समेत 16 देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है। सबसे गंभीर स्थिति फ्रांस में है, जहां 24 से 27 जून के बीच गर्मी से 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, मृतकों में करीब 85 प्रतिशत बुजुर्ग हैं और अधिकांश की मौत घरों में हुई। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। भीषण गर्मी का असर केवल लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई देशों में सड़कें पिघलने लगी हैं, ट्रैफिक लाइट और हाईवे गर्मी से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर लोगों को राहत देने के लिए पुलिस ने पानी की तोपों का इस्तेमाल किया। वहीं, जर्मनी के ड्रैविट्ज शहर में 41.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो देश के इतिहास का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। ब्रिटेन में लगातार तीन दिनों तक रेड हीट अलर्ट जारी करना पड़ा और 50 साल पुराने जून महीने के तापमान रिकॉर्ड लगातार टूट गए। अत्यधिक गर्मी के कारण 1,000 से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए गए और बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ। इटली में रोम, मिलान और वेनिस सहित 18 शहरों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि पो नदी का जलस्तर तेजी से घटने से खेती और पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। डेनमार्क में 1874 के बाद सबसे अधिक 37 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिसके चलते सड़कों को नुकसान से बचाने के लिए भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई। वहीं, स्विट्जरलैंड में रिकॉर्ड गर्मी के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में हीटवेव की घटनाएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में ऐसे हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।