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शिंदे सेना को मिली बड़ी ताकत, सचिन अहीर ने थामा पार्टी का हाथ
June 30, 2026 Source: News Katha
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर ने पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। अहीर के इस फैसले को उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है।
शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इस पद के लिए महाविकास आघाड़ी ने जे. एम. अभ्यंकर को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिससे चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
सचिन अहीर का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की, इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में रहे और फिर 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए। उस समय उनकी मौजूदगी ने मुंबई की वर्ली सीट पर आदित्य ठाकरे की चुनावी रणनीति को मजबूती दी थी। वर्ष 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद भी अहीर उद्धव ठाकरे के साथ बने रहे, लेकिन अब उन्होंने शिंदे गुट का साथ चुन लिया है।
अहीर का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार दल-बदल की चर्चाएं चल रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) के कई नेताओं के शिंदे गुट के संपर्क में होने की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं। ऐसे माहौल में सचिन अहीर का पार्टी बदलना राजनीतिक हलकों में बड़ी घटना माना जा रहा है। उनके इस फैसले ने न केवल उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।