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धर्म बदलते ही SC/ST एट्रोसिटी एक्ट की सुरक्षा समाप्त, बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी
June 30, 2026 Source: News Katha
**मुंबई:** बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेता है, तो वह **अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989** के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन का असर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज अन्य आपराधिक मामलों पर नहीं पड़ेगा और उन आरोपों की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।
यह मामला एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा था। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी ननद और नंदोई ने उसके साथ मारपीट की और उसकी पूर्व जाति को जानते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसी आधार पर महिला ने SC/ST एट्रोसिटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी।
सुनवाई के दौरान महिला ने अदालत को बताया कि विवाह के समय उसने अपने मुस्लिम पति के साथ इस्लाम धर्म अपना लिया था। धर्म परिवर्तन के बाद उसने अपना नाम भी बदल लिया और तब से वह मुस्लिम धर्म का पालन कर रही है।
आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि यह केवल पारिवारिक और संपत्ति से जुड़ा विवाद है तथा SC/ST एक्ट के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते। सरकारी पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति इस अधिनियम के तहत मिलने वाले संरक्षण का लाभ नहीं ले सकता।
न्यायमूर्ति वृषाली वी. जोशी की एकल पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद SC/ST एट्रोसिटी एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को निरस्त कर दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि एफआईआर में दर्ज IPC की अन्य धाराओं के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए उन आरोपों की कानूनी सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।