Politics
राघव चड्ढा के ही बिल से रुक सकती थी उनकी पार्टी छोड़ने की राह, सख्त एंटी-डिफेक्शन कानून की थी मांग
April 27, 2026
आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका पुराना प्रस्तावित कानून और हालिया राजनीतिक फैसला है। 2022 में राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य के रूप में प्रवेश करने के बाद, चड्ढा ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जिसमें दल-बदल विरोधी कानून को और सख्त बनाने की मांग की गई थी। इस बिल के तहत किसी पार्टी में विभाजन या विलय को वैध ठहराने के लिए दो-तिहाई नहीं बल्कि तीन-चौथाई बहुमत जरूरी करने का प्रस्ताव था।
हाल ही में चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के छह अन्य सदस्यों के साथ पार्टी छोड़कर बीजेपी में विलय की घोषणा की, जो मौजूदा नियमों के तहत दो-तिहाई बहुमत के आधार पर संभव हुआ। लेकिन अगर उनका प्रस्तावित बिल कानून बन गया होता, तो उन्हें कम से कम सात सदस्यों का समर्थन चाहिए होता और यह कदम उठाना आसान नहीं होता।
इसके अलावा, उनके बिल में यह भी प्रावधान था कि पार्टी तोड़ने वाले नेताओं को छह साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाए। इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में दल-बदल कानून की कमजोरियों और सुधार की जरूरत पर फिर से बहस छेड़ दी है।