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सऊदी के दबाव में पीछे हटा अमेरिका, ईरान के सामने बदला रुख
May 7, 2026 Source: News Katha
दो महीने से अधिक समय तक चले तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शुरुआत में दावा किया था कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। यहां तक कि यह भी कहा गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत के बाद वहां तख्तापलट की स्थिति बन जाएगी। हालांकि, हालात ट्रंप के अनुमान के बिल्कुल उलट साबित हुए और ईरान की सत्ता मजबूत बनी रही।
इसके बाद ट्रंप ने मार्च में यह बयान दिया कि ईरान के साथ किसी भी तरह की युद्धविराम वार्ता नहीं होगी, लेकिन कुछ ही समय बाद अमेरिका को अपने रुख में नरमी दिखानी पड़ी। अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नाम से सैन्य अभियान शुरू किया। इस अभियान का उद्देश्य ईरानी नाकाबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाना था।
लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन को अचानक रोकने के पीछे सऊदी अरब की बड़ी भूमिका रही। बताया गया कि सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। सऊदी नेतृत्व को डर था कि यदि युद्ध और बढ़ता है तो इसका सबसे बड़ा असर खाड़ी देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसी वजह से सऊदी अरब ने अमेरिका पर तनाव कम करने और समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव बनाया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस ने साफ संकेत दिए कि वे क्षेत्र में बड़े युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। इसके बाद ट्रंप प्रशासन को “प्रोजेक्ट फ्रीडम” केवल 48 घंटे के भीतर रोकना पड़ा। इस घटनाक्रम को कई विश्लेषक अमेरिका की रणनीतिक मजबूरी और मध्य पूर्व में बदलते शक्ति संतुलन के रूप में देख रहे हैं।