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महाराष्ट्र में भाषा राजनीति तेज, मनसे के दबाव में सरकार का बड़ा फैसला

May 7, 2026 Source: News Katha

महाराष्ट्र में भाषा राजनीति तेज, मनसे के दबाव में सरकार का बड़ा फैसला
महाराष्ट्र में एक बार फिर भाषा को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राज्य सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित हिंदी भाषा परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा 28 जून को आयोजित होने वाली थी, लेकिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के तीव्र विरोध के बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार के भाषा निदेशालय ने राजपत्रित और अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए मुंबई, पुणे और नागपुर समेत चार केंद्रों पर हिंदी परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की थी। यह परीक्षा उन कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मानी जाती थी जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा में दसवीं तक हिंदी विषय नहीं पढ़ा था। नियमों के अनुसार, सरकारी सेवा में आने के बाद उन्हें निश्चित समय सीमा के भीतर यह परीक्षा पास करनी होती थी। परीक्षा में असफल रहने पर वेतन वृद्धि रुकने या पदोन्नति में बाधा जैसी कार्रवाई का प्रावधान भी था। इस फैसले का मनसे ने जोरदार विरोध किया। पार्टी का कहना था कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सरकारी कर्मचारियों पर हिंदी थोपना उचित नहीं है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि परीक्षा रद्द नहीं की गई तो परीक्षा केंद्रों पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने परीक्षा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया। राज्य के मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने पुष्टि करते हुए कहा कि फिलहाल हिंदी परीक्षा पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले को मनसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत मान रही है, जबकि हिंदीभाषी समाज के कई लोग इसे भाषाई राजनीति को बढ़ावा देने वाला कदम बता रहे हैं। महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं, और इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य की भाषा राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।