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पूर्व CJI गवई का बयान- भारत में कोई संस्था सर्वोच्च नहीं

May 10, 2026 Source: News Katha

पूर्व CJI गवई का बयान- भारत में कोई संस्था सर्वोच्च नहीं
भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश B. R. Gavai ने श्रीलंका की राजधानी Colombo में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय लोकतंत्र और संविधान की सर्वोच्चता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत जैसे संवैधानिक लोकतंत्र में शक्ति किसी एक संस्था या केंद्र के पास नहीं होती, बल्कि देश का पूरा शासन संविधान के दायरे में संचालित होता है। उनके अनुसार, भारत में संसद नहीं बल्कि संविधान सर्वोच्च है और सभी संस्थाएं उसी से अपनी शक्तियां प्राप्त करती हैं। पूर्व CJI गवई ने University of Colombo द्वारा आयोजित ‘19वें सुजाता जयवर्धने मेमोरियल ओरेशन’ में यह बात कही। उन्होंने बताया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी मजबूत रहती है जब विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका अपनी-अपनी संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि भारत की संवैधानिक संरचना इस सिद्धांत पर आधारित है कि कोई भी संस्था असीमित अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकती। अपने संबोधन में न्यायमूर्ति गवई ने स्पष्ट किया कि संसद, सरकार और न्यायपालिका तीनों संविधान से शक्ति प्राप्त करते हैं और उसी के अधीन कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल अपनी सर्वोच्चता को स्वीकार करता है और सभी संस्थाएं उसकी सीमाओं से बंधी हुई हैं। उन्होंने इसे शक्ति के संतुलन और जवाबदेही की व्यवस्था बताया। पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने B. R. Ambedkar के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान ने शासन के हर अंग को स्वतंत्र भूमिका दी है, लेकिन उनकी सीमाएं भी तय की हैं। उन्होंने न्यायपालिका को “संवैधानिक प्रहरी” बताते हुए कहा कि अदालतों का दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्था संविधान का उल्लंघन न करे। हालांकि, उन्होंने न्यायपालिका को भी संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। गवई ने कहा कि न्यायिक समीक्षा जरूरी है, लेकिन इसे न्यायिक अतिरेक में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि न्यायिक सक्रियता अगर सीमाओं से बाहर चली जाए तो यह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में संसद और न्यायपालिका की भूमिकाओं को लेकर लगातार बहस होती रही है। गवई के इस संबोधन को भारतीय लोकतंत्र में संविधान की सर्वोच्चता और संस्थागत संतुलन की याद दिलाने वाला महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।